आखिर एड्समेटा में जवान की मौजूदगी से क्यों भडके सीबीआई के अफसर ...बयान लिए बगैर लौटे

NEWS DESK R : 20-07-19 11:25:07

 रौशन वर्मा

बीजापुर :- सीबीआई टीम लीडर सारिका जैन ने ग्रामीणों से बयान लिए बगैर लौटने को लेकर खेद जताया है और आश्वस्त किया  कि बयान लेने सीबीआई फिर आयेगी ।
दरअसल एड्समेटा में सीबीआई जब लोगों से बातचीत कर रही थी तभी उसे मालूम हुआ कि यहां एक जवान पत्रकार बनकर मौजूद है । समाजसेविका सोनी सोढ़ी ने भी जवान की मौजूदगी पर कड़ा एतराज जताया और कहा कि बातचीत के वक्त भी यह जवान वहां था । जब टीम लौट रही थी तब ग्रामीण महिलाओं ने उसका जूता देख पहचाना और पकड़कर सीबीआई के सामने लाया तब जाकर उसने जवान होना कबूला । सोनी सोढ़ी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने बयान के दौरान किसी भी पुलिस के जवान की मौजूदगी पर सख्त पाबंदी लगाई थी ।  सोनी सोढ़ी ने मीडिया की उपस्थिति के बारे में सुको के द्वारा किसी तरह के निर्देश न होने की बात भी कही ।
समाज सेविका सोढ़ी का कहना है कि बड़ी मुश्किलों से 7 किमी से अधिक का सफर पैदल चलकर पहाड़ी व नालों को पार कर सीबीआई का दल एड्समेटा पहुंचा था ।  अगली बार सम्भावना है कि सीबीआई गंगालूर में बयान लेने ग्रामीणों को बुला सकती है क्योंकि गांव में कम्प्यूटर व टाइपिंग आदि की सुविधा नहीं है सोनी सोढ़ी ने भी कहा कि वे इस समस्या से ग्रामीणों को अवगत करा उनसे गंगालूर आकर बयान देने का अनुरोध करेंगी ।

सोनी सोढ़ी एवम याचिकाकर्ता ने एक महिला सीबीआई अफसर के एड़समेटा जैसे अंदरूनी गांव में पैदल जाने को काबिल ए तारीफ बताते कहा कि शुक्रवार को गंगालूर पहुंचते टीम को रात हो गई थी।  बताया जा रहा है कि अगस्त में गंगालूर में बयान लेने की नोटिस पीड़ित परिवारों को दी गई है लेकिन इसका ये कहकर विरोध किया जा रहा है कि बयान गांव में ही हो।लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सुको के कड़े प्रतिबंध के बाद भी इस जवान ने ये हिम्मत कैसे की ? क्योंकि बिना किसी बड़े समर्थन व प्रोत्साहन के जवान ऐसी जिंदादिली नहीं कर सकता ।
अभी तक यह भी मालूम नहीं हुआ है कि इस जवान के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया है ।



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