सोनू के टीटू की स्वीटी मूवी में अंबिकापुर के इन फनकारों ने दिया था म्यूजिक, मिला IIFA अवॉर्ड

hindustan path : 24-09-19 09:22:09

रायपुर. 'सोनू के टीटू की स्वीटी',  ये मूवी शायद हम सभी ने देखी होगी. यंग जनरेशन को ध्यान में रख कर बनाई गई ये मूवी युवाओं के बीच काफी फेमस भी हुई. लेकिन क्या आप जाने हैं, इस फिल्म में म्यूजिक ,देने वाले सौरभ-वैभव छत्तीसगढ़ से हैं. आपको बता दें कि अंबिकापुर जिले के रहने वाले सौरभ गुप्ता  और वैभव सिंह सेंगर  ने इस फिल्म को अपने संगीत से सजाया है. इस म्यूजिकल जोड़ी को बुधवार रात आयोजित आइफा अवॉर्ड 2019 में सम्मानित किया गया. इस साल के आइफा अवॉर्ड में 2018 के बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन  के अवॉर्ड लिए फिल्म सोनू के टीटू की स्वीटी को चुना गया था. इसमे संगीतकार हनी सिंह, अरमान मलिक, रोचक कोहली, गुरू रंधवा, सौरभ-वैभव के साथ जैक नाइट को बेस्ट म्यूजिशियन का अवॉर्ड मिला. फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े अवॉर्ड शो इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी (आईफा) अवॉर्ड्स बुधवार को आयोजित किया गया. आईफा ने 20 साल पूरे होने का जश्न मनाया. सितारों से भरे इस इवेंट में सौरभ गुप्ता और वैभव सिंह सेंगर ने बेस्ट म्यूजिशियन का अवॉर्ड अपने नाम किया. ये कोई पहला मौका नहीं है जब सौरभ-वैभव ने अपने प्रतिभा का लोहा मनवाया. फिल्म निर्देशक गुरिंदर चढ़ा की फ़िल्ममें बतौर म्यूजिक डायरेक्टर काम करने के बाद उन्हे लोग जानने लगे और दोनों पॉपुलर हुए. मेलबर्न फिल्म सिटी पुरस्कार  , मिर्ची अवॉर्ड को भी ये दोनों अपने नाम कर चुके हैं. अंबिकापुर की गलियों में बड़े हुए इन युवा संगीतकारों का म्यूजिक से लगाव शुरू से ही था. बता दें कि सौरभ शहर के सदर रोड इलाके के रहने वाले हैं. वहीं वैभव एक चिकित्सक के बेटे हैं , सौरभ बताते हैं कि प्रारंभिक शिक्षा हम दोनों की अंबिकापुर में ही हुई. फिर खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय से मैंने संगीत में एमए किया. डिग्री लेने के बाद अंबिकापुर के कार्मेल स्कूल में बतौर म्यूजिक टीचर जॉब शुरू कर दी. इस दौरान मेरी मुलाकात वैभव से हुई

सौरभ बताते हैं, हम दोनों को एक दूसरे का म्यूजिक अच्छा लगा, तो सोचा की साथ मिलकर कुछ किया जा सकता है. फिर वैभव बायोटेक करने पुणे आ गया साथ में मैं भी चला आया. पुणे से सही तौर पर हमने शुरूआत की. पुणे से मुंबई तक का सफर किया करते थे. 2010 में गुरिंदर चढ़ा की मूवी It's a के हिंदी वर्जन हाये मरजावा में काम करने का मौका मिला. इस मूवी में शबाना आज़मी लीड रोल में थीं. इस मूवी में हमे एक गाना कंपोज करने का मौका मिला, जिसे मोहित चौहान ने गाया था.

सौरभ ने बताया कि,  2011 के बाद से हमारे स्ट्रगल का दौर शुरू हुआ. फिर हम पुणे शिफ्ट हो गए. लोगों को कॉल करने, मिलने का दौर शुरू हुआ. फिर प्यार का पंचनामा मूवी के डायरेक्टर लव रंजन से हमारी मुलाकात हुई. उनको हमारा काम पसंद आया. इस दौरान हमने लाइफ सही है वेब सीरीज का टाइटल ट्रैक  किया. काफी जिंगल्स भी बनाए. साउथ की मूवी में काम करना शुरू किया. कन्नड भाषा की मूवी बीर्बल में हमने म्यूजिक दिया, फिल्म में एक गाना भी मैंने गाया. ऐसे हमारी जर्नी स्टार्ट हुई. पिछले साल सोनू के टीटू की स्वीटी के लिए रोडिओ मिर्ची अवॉर्ड मिला. शॉर्ट मूवी फोर्थ एवरग्रीन के लिए बैकग्राउंड स्कोर के लिए मेलबर्न फिल्म सिटी अवॉर्ड मिला.

सौरभ बताते हैं कि जब से म्यूजिक अच्छा लगने लगा, तब से ए आर रहमान को ही सुना हैं. इन्हे काफी सुना है. विशाल-शेखर भी हैं, जो काफी अच्छा काम करते है. ए आर रहमान का म्यूजिक हमेशा से ही पसंद आया है. सौरभ का कहना है कि इस साल तीन मूवी बनकर तैयार हैं. रिलीज डेट फाइनल नहीं हुआ है, जिस पर अभी काम किया जा रहा है. इसके अलावा दो साउथ की मूवी में भी हमने काम किया है, जो रिलीज होने वाली है. आने वाले 6 से 7 महीनों में हमारी 4 से 7 मूवी रिलीज हो जाएगी.

सौरभ बताते हैं कि शुरुआती दिनों में काफी स्ट्रगल  करना पड़ा. काम के सिलसिले में दिन रात का सफर करना पड़ा था. लोकल ट्रेन के आना-जाना हमेशा याद आता है. पहले 20 लोगों को कॉल करते थे, तो एक का रिस्पॉन्स आता था. हमारे जैसे मुंबई में कई स्ट्रगलर्स हैं, फाइनलाइज करना-रिजेक्ट होना लगा रहता था.

सौरभ का कहना है कि परिवार का साथ हमेशा रहा. स्पेशली हम दोनों की मम्मी ने हमारा पूरी सपोर्ट किया. मेरा साथ मेरी पत्नी ने भी मेरा पूरा साथ दिया. अवॉर्ड मिलने के बाद पूरा परिवार काफी खुश है. मेरे बड़े भाई और बहन का पूरा स्पोर्ट रहा. मेरे दोनों बच्चे भी खुश हैं. वैभव के पापा, मम्मी और उसके भाई भी हमारे साथ खड़े रहे.


साभार न्यूज़ १८




add