Current Date:24 Oct 2021





छग पहुँचे केंद्रीय मंत्री को नहीं मिला हेलीकॉप्टर, सड़क मार्ग से हुए रवाना

कोयला संकट के बीच छत्तीसगढ़ पहुंचे केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी को हेलीकाप्टर नहीं मिल पाया। दिल्ली से स्पेशल विमान से बिलासपुर पहुंचे केंद्रीय मंत्री को कोरबा जाना था, जहां उन्हें खदानों का निरीक्षण करना था, लेकिन हेलीकाप्टर की जगह अब वे सड़क मार्ग से कोरबा गए हैं।

छग पहुँचे केंद्रीय मंत्री को नहीं मिला हेलीकॉप्टर, सड़क मार्ग से हुए रवाना


बिलासपुर : कोयला संकट के बीच छत्तीसगढ़ पहुंचे केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी को हेलीकाप्टर नहीं मिल पाया। दिल्ली से स्पेशल विमान से बिलासपुर पहुंचे केंद्रीय मंत्री को कोरबा जाना था, जहां उन्हें खदानों का निरीक्षण करना था, लेकिन हेलीकाप्टर की जगह अब वे सड़क मार्ग से कोरबा गए हैं।

हालांकि पहले जो मिनट टू मिनट कार्यक्रम जारी किया गया था, उसके मुताबिक वह हेलीकाप्टर या सड़क मार्ग में से किसी भी जरिए से कोरबा पहुंच सकते थे। लेकिन शेड्यूल के मुताबिक बिलासपुर पहुंचने के करीब आधे घंटे बाद कोरबा में उनका कार्यक्रम था, लिहाजा यह तभी संभव था, जब वो हेलीकाप्टर से कोरबा आते।

हेलिकॉप्टर की उपलब्धता नहीं होने की वजह से अब वह सड़क मार्ग से कोरबा गए हैं। तय कार्यक्रम में अब करीब दो घंटे का विलंब होगा। इससे पहले केंद्रीय मंत्री सुबह साढ़े ग्यारह बजे से दोपहर दो बजे तक गेवरा खदान सहित कुसमुंडा और दीपका परियोजना का जायजा लेते हए कोयला उत्पादन की जानकारी लेने प्रोटोकाल जारी किया गया था।

इसके बाद दोपहर में एसईसीएल के अधिकारियों से बैठक कर कोयला उत्पादन और डिस्पैच की समीक्षा करनी थी। दोपहर ढाई बजे कोयला मंत्री जोशी गेवरा से वापस बिलासपुर और फिर विशेष विमान से बिलासपुर से रांची के लिए रवाना होने वाले थे। लेकिन जिस तरह से शेड्यूल बदला है, उसके बाद माना यही जा रहा है कि कार्यक्रम में अब बदलाव हो सकता है। हो सकता है तीन खदानों की जगह सिर्फ एक या दो प्रोजेक्ट में ही जाएं।

मंत्री के आने के पहले ही कोरबा में भू विस्थापितों ने खोला मोर्चा

केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी के दीपका खदान प्रवास से पहले भू-विस्थापितों ने भी अपना आंदोलन तेज कर दिया है। खदान के बाहर धरने पर बैठे हुए स्थापित अब खदान के नीचे उतर गए हैं और खदान के अंदर ही तंबू लगाकर धरने पर बैठ गए हैं।

बताया जा रहा है कि खदान में चल रहा है डंपर वास्ता वेल को भी बंद करा दिया है। करीब 12 दिन से नौकरी व मुआवजा की मांग को लेकर भू-विस्थापित आंदोलन कर रहे हैं। भू- विस्थापितों के इस कदम से एसईसीएल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है।















Anjali Chandel
Anjali Chandel

www.hindustanpath.com