Current Date:24 Oct 2021





अनोखी परंपरा,रावण की नाभि से निकले अमृत से करते है तिलक

दशहरा उत्सव का नाम आते ही रामलीला और रावण दहन की छवि मानस पटल पर होती है। इसमें दशहरा के अंत में रावण का दहन किया जाता है।

अनोखी परंपरा,रावण की नाभि से निकले अमृत से करते है तिलक


फरसगांव : दशहरा उत्सव का नाम आते ही रामलीला और रावण दहन की छवि मानस पटल पर होती है। इसमें दशहरा के अंत में रावण का दहन किया जाता है। वहीं कोंडागांव जिले के कुछ छोटे से गांवों में चार दशक से एक अनूठी परंपरा चल रही है, जिसमें रावण बनाया तो जाता है लेकिन उसे जलाया नहीं जाता, बल्कि मिट्टी के बने रावण का वध किया जाता है। यह अनोखी परंपरा ग्राम हिर्री और भूमिका में होती है।

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के ग्राम भुमका और हिर्री में दशहरा मंचन अनोखे तरीके से किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है रावण को मारना मुश्किल था क्योंकि उसके नाभि में अमृत है। जिसका भगवान राम के द्वारा रावण की नाभि में तीर चलाकर वध किया जाता है। फिर ग्रामवासी रावण की नाभि से निकलने वाले अमृत के लिए रावण पर टूट पड़ते हैं और नाभि से निकलने वाले अमृत का माथे पर तिलक करते हैं।

सच्चाई की जीत का तिलक वंदन

महाज्ञानी ब्राह्मण रावण के बुरे कार्यों पर सच्चाई की जीत का तिलक वंदन करते हैं। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। भूमका के ग्रामीणों वीरेंद्र चनाप और देवसिंह निषाद का कहना है ऐसी मान्यता है नाभि से निकलने वाले अमृत का अपने माथे पर तिलक करने से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से स्वस्थ्य लाभ होता है















Anjali Chandel
Anjali Chandel

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