Current Date:05 Dec 2021






एक चुटकी प्यार

आज मैंने आपके जैसा हलवा बनाना सीख लिया

एक चुटकी प्यार



 *एक चुटकी प्यार*
’मां, पता है आज मैंने आपके जैसा हलवा बनाना सीख लिया।’ बेटे ने चम्मच भर गरमागरम हलवा मुंह में डालते हुए कहा।
’ अच्छा ? कैसे ? बताओ तो जरा।’ मां ने रसोई से ही उत्साह में पूछा।
’अभी ही। आप हलवा बना रही थीं और मैं दरवाजे पर खड़ा देख रहा था।’
’चल, ऐसे भी कहीं आता है हलवा बनाना ! अच्छा बता तो कैसे बनाया ?’
’देखो, सबसे पहले आपने कढ़ाही में घी डाला। फिर उसमें सूजी डाली। है न ?’
’ बिलकुल ठीक।’
’उसे धीमी आंच पर भूनती रहीं। बदामी रंग होने तक। सुगंध पूरे घर में महकने लगी थी..तब आपने गुनगुना पानी डाला। फिर डाली शकर । उसे अच्छी तरह से हिलाया और ऊपर से सूखे मेवे डाले। बस हलवा तैयार हो गया। सही बताया ना मैंने ?
’अरे वाह ! तुमने तो सच में मुझ जैसा हलवा बनाना सीख लिया। शाबास बेटा।’
’पर मां, सबसे आखिरी में आपने ऐसे चुटकी घुमाते हुए क्या डाला था? मैं देख ही नहीं पाया।’
’ वो .... कुछ नहीं बेटा..... वो तो यूं ही .....स्वाद के लिए बस एक चुटकी प्यार था।’
’ओह मां ! तो सारा स्वाद उसी चुटकी से आता है? मैं कहां लाऊंगा एक चुटकी मां का प्यार? मैंने गलत कहा। मैं आपके जैसा हलवा नहीं बना सकता मां।'
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 *मां* 
एक आदमी ऑफिस जा रहा तो उसे रास्ते में फूल की दुकान दिखाई दे तो सोचा आज मदर्स डे  है तो क्यों नहीं अपनी मां के लिए मै कुछ फूल या गुलदस्ते कुरियर गुलदस्ते कुरियर कर देता हूं।
दुकान के साइड में जाकर मोटरसाइकिल रोका  वही पर एक 10 साल की लड़की सर झुका कर बैठ कर रो रही थी
उस आदमी ने बच्ची के करीब जाकर पुछा क्या हुआ तुम्हें क्या तकलीफ है तुम ऐसे क्यों बैठी हो और रो क्यों क्यों रही हो
 रो रो कर उसकी आंख सूज गई थी और उसने बड़े ही नाजुक लवज से जवाब दिया मैं अपनी मां के लिए लाल गुलाब खरीदना चाहती हूं, लेकिन मेरे पास 5 रुपया ही है लेकिन गुलाब की कीमत 10 रुपया है  अगर और 5 रुपया की मदद मिल जाती तो मैं वह गुलाब खरीद सकती।
वह आदमी ने मुस्कुराया और कहा तुम मेरे साथ दुकान के अंदर चलो और तुम्हें जो फूल पसंद है वह ले लो, जो पैसा कम पड़ेगा मैं मदद कर दूंगा अब तुम थोड़ा मुस्कुराओ रोते हुए अच्छी नहीं लग रही हो।
बच्ची ने गुलाब खरीद कर कहा आप आगे जा रहे हैं तो कृपया आप मुझे रास्ते में थोड़ा दूर तक छोड़ सकते हैं हां क्यों नहीं चलो मैं तुम्हें घर तक छोड़ देता हूं।
थोड़ी दूर आगे जाने के बाद कब्रिस्तान आया तो बच्ची बोली आप मुझे यहीं उतार दो मेरी मां  यहीं रहती है बच्ची उतरकर कब्रिस्तान की तरफ जाने लग गई तो उसके पीछे पीछे वह आदमी भी गया ।
उसने देखा कि वह लड़की एक कब्र को फूलों से सजा रही थी और उससे लिपट गई
यह सब देखकर उस आदमी की आंखें खुल गई और उसे एहसास हो गया कि अपनों को खोने की गम  क्या होती है वो तुरंत वहा से वापस फूलो की दुकान पर गया और अपना कूरियर का आर्डर रद्द कर के खुद फूलो का गुलदस्ता ले कर अपने हाथो से माँ को देने के लिए निकल पड़ा।
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*मेरे तकदीर में एक भी गम नहीं होता अगर*
*तकदीर लिखने का हक मेरी मां को मिला होता*
* ॐ गं गणपतए नमः*
*जय श्री राम जय जय श्री राम*















Khyati
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